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पीटीआई-भाषा संवाददाता 16:42 HRS IST
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बेंगलुरु, 24 जुलाई (भाषा) जाने माने अंतरिक्ष वैज्ञानिक एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष यू आर राव का उम्र संबंधी बीमारियों के चलते आज यहां निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे । भारत के पहले सेटेलाइट आर्यभट्ट के पीछे राव का ही दिमाग था और उन्होंने देश के प्रमुख अंतरिक्ष कार्यक्रमों को निर्देशित किया था ।
इसरो के जनसंपर्क निदेशक देवीप्रसाद कार्णिक ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘राव ने कल देर रात करीब तीन बजे यहां अपने निवास परअंतिम सांस ली।’’ भारत के 1975 में पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम आर्यभट्ट से लेकर इसके चंद्रमा मिशन (चन्द्रयान-1) और मंगल (मंगलयान) और प्रस्तावित आदित्य सौर मिशन तक इसरो के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में किसी ना किसी रूप में राव शामिल रहे।
सेटेलाइट तकनीक स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का भी उन्हें श्रेय दिया जाता है। इस सेटेलाइट से भास्कर, एप्पल, रोहिणी, इनसैट-1 और इनसैट-2 श्रृंखलाओं की बहुउद्देशीय संचार और मौसम सेटेलाइट, आईआरएस-1ए, आईआरएस-1बी, आईआरएस-1सी और दूर संवेदी उपग्रह 1 डी सहित उपग्रहों के एक विस्तृत कार्यक्रम का शुभारंभ शुरू हुआ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रख्यात वैज्ञानिक, प्रोफेसर यू आर राव के निधन से दुखी हूं। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उनके उल्लेखनीय योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।’’ राव ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले दिवंगत वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ अपने कैरियर की शुरूआत कॉस्मिक रे वैज्ञानिक के तौर पर शुरू की थी । मेसाचुसेट्स प्रौद्योगिक संस्थान (एमआईटी) में एक संकाय सदस्य और डलास में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में एक प्रोफेसर के रूप में काम करने के बाद राव 1966 में अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री में एक प्रोफेसर के रूप में वापस आ गये
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इसरो के जनसंपर्क निदेशक देवीप्रसाद कार्णिक ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘राव ने कल देर रात करीब तीन बजे यहां अपने निवास परअंतिम सांस ली।’’ भारत के 1975 में पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम आर्यभट्ट से लेकर इसके चंद्रमा मिशन (चन्द्रयान-1) और मंगल (मंगलयान) और प्रस्तावित आदित्य सौर मिशन तक इसरो के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में किसी ना किसी रूप में राव शामिल रहे।
सेटेलाइट तकनीक स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का भी उन्हें श्रेय दिया जाता है। इस सेटेलाइट से भास्कर, एप्पल, रोहिणी, इनसैट-1 और इनसैट-2 श्रृंखलाओं की बहुउद्देशीय संचार और मौसम सेटेलाइट, आईआरएस-1ए, आईआरएस-1बी, आईआरएस-1सी और दूर संवेदी उपग्रह 1 डी सहित उपग्रहों के एक विस्तृत कार्यक्रम का शुभारंभ शुरू हुआ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रख्यात वैज्ञानिक, प्रोफेसर यू आर राव के निधन से दुखी हूं। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उनके उल्लेखनीय योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।’’ राव ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले दिवंगत वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ अपने कैरियर की शुरूआत कॉस्मिक रे वैज्ञानिक के तौर पर शुरू की थी । मेसाचुसेट्स प्रौद्योगिक संस्थान (एमआईटी) में एक संकाय सदस्य और डलास में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में एक प्रोफेसर के रूप में काम करने के बाद राव 1966 में अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री में एक प्रोफेसर के रूप में वापस आ गये
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