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आपरेटरों ने कहा, शून्य आईयूसी से ग्रामीण टेलीफोनी प्रभावित होगी, जियो की राय भिन्न

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पीटीआई-भाषा संवाददाता
 
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) इंटरकनेक्शन शुल्क को लेकर आपरेटरों की राय भिन्न-भिन्न है। प्रमुख दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन ने आज दलील दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में दूरसंचार ढांचा काफी हद तक इनकमिंग कॉल से मिलने वाले राजस्व पर निर्भर करता है। इंटरकनेक्ट प्रयोग शुल्क :आईयूसी: को समाप्त करने या उसमें कमी करने से ग्रामीण इलाकों में दूरसंचार सेवाएं प्रभावित होंगी।

हालांकि, रिलायंस जियो ने इस दलील को खारिज करते हुए दावा किया बेशक मोबाइल इंटरकनेक्शन शुल्क को समाप्त कर दिया जाए, तो भी वह इस साल के अंत तक 99 प्रतिशत कवरेज उपलब्ध करा देगी।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण द्वारा आयोजित खुली परिचर्चा में जियो के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘‘गरीब लोगों को दूरसंचार आपरेटरों के दक्षता की कमी वाले नेटवर्क के लिए ‘सब्सिडी’ देनी पड़ रही है। 4जी नेटवर्कपर कॉल ले जाने की लागत काफी कम बैठती है इसके बावजूद मौजूदा आपरेटर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को 2जी नेटवर्क ही दे रहे हैं। यदि कोई आपरेटर किसी गांव से जाना चाहता है तो हम वहां अगले दिन की नेटवर्क लगा सकते हैं।’’ ट्राई ने 2011 में उच्चतम न्यायालय में अपने हलफनामे में कहा था कि दूरसंचार आपरेटरों को बिल एंड कीप व्यवस्था में जाने के लिए 2014 तक का समय दिया जाना चाहिए। इसके तहत आपरेटर अपने नेटवर्क पर आने वाली इनकमिंग कॉल्स का रिकॉर्ड रख सकते हैं लेकिन दूसरे आपरेटरों से इसके लिए मांग नहीं कर सकते हैं।

अधिकारी ने कहा कि 2014 से आगे आईयूसी को जारी रखने से मौजूदा आपरेटरों को एक लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।

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