नयी दिल्ली, छह नवंबर :भाषा: मोरक्को के मारकेश में आगामी वैश्विक जलवायु सम्मलेन में भारत दीर्घकालिक जीवनशैली के एजेंडा को आगे बढ़ाएगा। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए बनाए गए कोष के लिए आर्थिक सहायता जुटाना उसके लिए चिंता का प्रमुख विषय है।
मारकेश में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन सात से 18 नवंबर को होना है। इसमें राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के खतरे से निबटने की वैश्विक प्रतिक्रियाओं को मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इसमें मुख्य फोकस अपेक्षाओं, प्रचार और क्रियान्वयन को बढ़ावा देना और सहयोग उपलब्ध करवाना होगा।
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कहा गया, ‘‘जलवायु परिवर्तन समझौते में दीर्घकालिक जीवनशैली के महत्व को पहली बार शामिल किया गया है, यह भारत के लिए बहुत बड़ी जीत है। भारत ने हमेशा से ही दीर्घकालिक जीवनशैली के रास्ते को अपनाया है। यह जरूरत आधारित उपभोग के नियम पर आधारित है। मोरक्को में होने वाले सम्मेलन में भारत दीर्घकालिक जीवनशैली के एजेंडा को आगे बढ़ाएगा।’’ इसके साथ ही भारत अनुकूलन कार्रवाई अपनाने की जरूरत पर भी जोर देगा। विकासशील देशों के लिए खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर कृषि क्षेत्र में अनुकूलता सर्वप्रथम प्राथमिकता है।
पेरिस समझौते के तहत जिन नए अंगों का गठन किया गया है भारत उनके सक्रिय संचालन और अर्थपूर्ण परिणाओं के लिए भी दबाव बनाएगा। इसमें तकनीकी तंत्र और क्षमता निर्माण पर पेरिस समिति भी शामिल है।
पेरिस समझौता कल ही प्रभावी हुआ है।
मारकेश में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन सात से 18 नवंबर को होना है। इसमें राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के खतरे से निबटने की वैश्विक प्रतिक्रियाओं को मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इसमें मुख्य फोकस अपेक्षाओं, प्रचार और क्रियान्वयन को बढ़ावा देना और सहयोग उपलब्ध करवाना होगा।
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कहा गया, ‘‘जलवायु परिवर्तन समझौते में दीर्घकालिक जीवनशैली के महत्व को पहली बार शामिल किया गया है, यह भारत के लिए बहुत बड़ी जीत है। भारत ने हमेशा से ही दीर्घकालिक जीवनशैली के रास्ते को अपनाया है। यह जरूरत आधारित उपभोग के नियम पर आधारित है। मोरक्को में होने वाले सम्मेलन में भारत दीर्घकालिक जीवनशैली के एजेंडा को आगे बढ़ाएगा।’’ इसके साथ ही भारत अनुकूलन कार्रवाई अपनाने की जरूरत पर भी जोर देगा। विकासशील देशों के लिए खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर कृषि क्षेत्र में अनुकूलता सर्वप्रथम प्राथमिकता है।
पेरिस समझौते के तहत जिन नए अंगों का गठन किया गया है भारत उनके सक्रिय संचालन और अर्थपूर्ण परिणाओं के लिए भी दबाव बनाएगा। इसमें तकनीकी तंत्र और क्षमता निर्माण पर पेरिस समिति भी शामिल है।
पेरिस समझौता कल ही प्रभावी हुआ है।
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