भारत में चुनाव सुधार के सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जून २००२ में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा यह आदेश जारी किया गया कि प्रत्येक प्रतिभागी को शपथ -पत्र देना होगा ,जिसमें अर्जित सम्पत्ति के साथ -साथ आपराधिक प्रकरणों का ब्यौरा दर्ज करना अनिवार्य है।
आचार -संहिता ,सुरक्षा -निधि में बढ़ोत्तरी ,राजनीतिक दलों का पंजीयन ,लेखा बही की अनिवार्यता ,जनप्रतिनिधित्व अधिनियम १९५० जो मुख्यतः निर्वाचन सूची की तैयारी तथा पुनः परीक्षण से सम्बंधित है ,के साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम १९५१ जो चुनाव के वास्तविक संचालन हेतु दिशा -निर्देश का कार्य करता है ,के द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का प्रावधान किया गया है।
भारत में धर्म ,जाति ,क्षेत्र ,भाषा तथा अन्य सामाजिक भावनावों से ओत -प्रोत होकर मतदान करने की प्रवृति को दूर करने के लिए सभी राजनीतिक दलों में आतंरिक लोकतंत्र का विकास करना होगा ,जिसे निम्न प्रकार से किया जा सकता है।
भारत के सभी राजनीतिक दल अपने ग्राम -पंचायत स्तर के सदस्यों के समूह से एक ग्राम पंचायत अध्यक्ष का गुप्त मतदान के माध्यम से चुनाव करें।
जनपद पंचायत स्तर पर उस जनपद में सम्मिलित सभी ग्राम पंचायत के अध्यक्ष गुप्त मतदान द्वारा जनपद अध्यक्ष का चुनाव करें।
विधान सभा स्तर पर उस विधान सभा में समावेशित सभी जनपद के अध्यक्ष अपने दल के विधान सभा अध्यक्ष का चुनाव करें।
लोक सभा स्तर पर उस लोकसभा में समावेशित सभी विधान सभा के अध्यक्ष अपने दल के लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव गुप्त मतदान प्रणाली से करें।
इस प्रकार से विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा चुने गए अपने प्रतिनिधियों को ही उस
स्तर पर चुनाव के लिए नामांकित किया जावे।
विभिन्न राजनितिक दलों द्वारा निर्धारित समय(०३ -०५ वर्ष )पर चुने गए अपने प्रतिनिधियों का पुस्तिका रखा जाय ,जिसकी जांच राजनितिक दलो के पंजीयक द्वारा किया जाय।
भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपने सदस्यों के समूह से अपने प्रतिनिधियो का चुनाव कर चुने हुए प्रतिनिधियों को चुनाव में भाग लेने का टिकट दिए जाने की अनिवार्यता का कानून बनाये जाने से चुनाव की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
आचार -संहिता ,सुरक्षा -निधि में बढ़ोत्तरी ,राजनीतिक दलों का पंजीयन ,लेखा बही की अनिवार्यता ,जनप्रतिनिधित्व अधिनियम १९५० जो मुख्यतः निर्वाचन सूची की तैयारी तथा पुनः परीक्षण से सम्बंधित है ,के साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम १९५१ जो चुनाव के वास्तविक संचालन हेतु दिशा -निर्देश का कार्य करता है ,के द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का प्रावधान किया गया है।
भारत में धर्म ,जाति ,क्षेत्र ,भाषा तथा अन्य सामाजिक भावनावों से ओत -प्रोत होकर मतदान करने की प्रवृति को दूर करने के लिए सभी राजनीतिक दलों में आतंरिक लोकतंत्र का विकास करना होगा ,जिसे निम्न प्रकार से किया जा सकता है।
भारत के सभी राजनीतिक दल अपने ग्राम -पंचायत स्तर के सदस्यों के समूह से एक ग्राम पंचायत अध्यक्ष का गुप्त मतदान के माध्यम से चुनाव करें।
जनपद पंचायत स्तर पर उस जनपद में सम्मिलित सभी ग्राम पंचायत के अध्यक्ष गुप्त मतदान द्वारा जनपद अध्यक्ष का चुनाव करें।
विधान सभा स्तर पर उस विधान सभा में समावेशित सभी जनपद के अध्यक्ष अपने दल के विधान सभा अध्यक्ष का चुनाव करें।
लोक सभा स्तर पर उस लोकसभा में समावेशित सभी विधान सभा के अध्यक्ष अपने दल के लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव गुप्त मतदान प्रणाली से करें।
इस प्रकार से विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा चुने गए अपने प्रतिनिधियों को ही उस
स्तर पर चुनाव के लिए नामांकित किया जावे।
विभिन्न राजनितिक दलों द्वारा निर्धारित समय(०३ -०५ वर्ष )पर चुने गए अपने प्रतिनिधियों का पुस्तिका रखा जाय ,जिसकी जांच राजनितिक दलो के पंजीयक द्वारा किया जाय।
भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपने सदस्यों के समूह से अपने प्रतिनिधियो का चुनाव कर चुने हुए प्रतिनिधियों को चुनाव में भाग लेने का टिकट दिए जाने की अनिवार्यता का कानून बनाये जाने से चुनाव की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
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